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सुप्रीम कोर्ट का EC पर बड़ा फैसला, SIR प्रक्रिया वैध, चुनाव आयोग को पूरी छूट

सुप्रीम कोर्ट ने SIR प्रक्रिया को वैध ठहराते हुए चुनाव आयोग को मतदाता सूची की गहन जांच का अधिकार दिया। अदालत ने कहा, आयोग ने अपनी संवैधानिक सीमाएं नहीं लांघीं।

Reported by Shagun Chaurasia and edited by Shagun Chaurasia

Supreme Court || SIR || Election Commission || Supreme Court Hearing: भारत का सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए चुनाव आयोग (EC) के अधिकारों को बरकरार रखा है। अदालत ने साफ कहा कि चुनाव आयोग को मतदाता सूचियों की जांच और विशेष पुनरीक्षण करने का पूरा संवैधानिक व कानूनी अधिकार प्राप्त है।

SC ने क्या कहा अपने फैसले में

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि SIR प्रक्रिया को केवल इसलिए अवैध नहीं कहा जा सकता क्योंकि यह सामान्य पुनरीक्षण प्रक्रिया से अलग है। अदालत के अनुसार, जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 की धारा 21(3) चुनाव आयोग को विशेष परिस्थितियों में मतदाता सूची का गहन पुनरीक्षण करने की अनुमति देती है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकान्त ने सुनवाई के दौरान तीन अहम सवाल उठाए। पहला, क्या चुनाव आयोग को SIR लागू करने का अधिकार है? दूसरा, क्या यह प्रक्रिया किसी वैध उद्देश्य पर आधारित है? और तीसरा, क्या इसमें अपनाई गई कार्यप्रणाली कानून और नियमों के अनुरूप है?

लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए जरूरी है SIR

अदालत ने कहा कि आयोग ने अपनी संवैधानिक सीमाओं से बाहर जाकर कोई कार्य नहीं किया। साथ ही यह भी माना गया कि SIR का उद्देश्य निष्पक्ष और पारदर्शी मतदाता सूची तैयार करना है, जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यह प्रक्रिया जन प्रतिनिधित्व अधिनियम का उल्लंघन नहीं करती, बल्कि संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत चुनाव आयोग की जिम्मेदारियों को प्रभावी ढंग से लागू करती है। इस फैसले को चुनाव आयोग के लिए बड़ी कानूनी जीत माना जा रहा है।

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